Unkaheen Baatein by Dipesh Hedamba

Manzil

बहोत दूर है ख्वाहिशें मंझिलो की,
रस्तो में ऊतार चड़ाव बहोत है…

वक़्त लगता है कही पहुंचने मेे,
पर सफ़र मे मज़ा भी बहोत है…

थक हार तू बेठ मत इंताजर उसे हे तेरा,
हासिल करना है तुझे ओर मंज़िल बहोत दूर है…

दूर कहीं दिख रहा उजाला चिराग सा,
जीस राह पे चल रहा उसमें कंकंड बहोत है…

मीलेगे कई रास्तो मैं बेहला ने के लीये भी,
मंज़िल तक पहुंचना है पर इमतिहान बहोत है…

है हौसला पनेका तो सफलता मिलेगी तूझे,
परीश्रम करेगा, तो रास्ते बहोत है…

सबर से तू पयेगा मंजिल है जो तेरी,
असफलता जो मीले तो मोके भीे बहोत है…

लक्ष्य तूझे जो हासिल हो तो ये कभी ना भूलना,
एक मूकाम है मीला, और भी बहोत है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back To Top