Unkaheen Baatein by Dipesh Hedamba

नाराज

हर बात, हर लम्हा, याद रेहने की बिमारी सी हो गई है,क्या पता क्यू मुजे दोस्ती निभाने की आदत सी हो गई है,कभी जो मैं ख़ुद से ख़ुश रह लिया करतार थाअब अपनो से ही “ना’’ सुनने के आदत सी हो गई है, कभी जो लडो अपनो से ही, अपनो के लिये,ये भुलना नहीं के […]

Read More
Unkaheen Baatein by Dipesh Hedamba

मुलाकात

मिला आज उससे मैं कई सालों बाद,वही मासूमियत और उसकी वो बालो की खुशबु के साथ, आई थी वो उसकी मुस्कान में कुछ दर्द और बातें छिपा कर,कहने आई ऐसी बातें जो बयां न कर पायी दूर रह कर, दर्द देने के लिए नहीं पर इस बार दर्द बांटने आई थी,कहने आई थी कि कैसे […]

Read More
Unkaheen Baatein by Dipesh Hedamba

कुछ साथी सफर में छूट गए…

“ज़िन्दगी के दौड़ में कुछ यू दौडे हम सब कोई आगे तो कोई पीछे यू बिछड़ गए हम सब, दोस्ती की कसमें जो कभी खाए करते थे, जो मिलने के वादे भी किया करते थे, कुछ दूर क्या हुवे हम घर की जलतोजहत में, सब बदल गए थोड़े मसरूफ क्या हुवे हम सब, पैसे कमाने […]

Read More
Unkaheen Baatein by Dipesh Hedamba

ज़िन्दगी के खेल…

” कैसे समझाऊं ये दर्द जो सीने में कहीं छिपा रखा है,ये ज़िन्दगी के खेल में कितने किस्से और सपने दबा रखा है… हर रोज़ नयी सुबह खुधको कई झूठ बोल और हस कर निकाल लेती हूँ,माँ और बाबा को भी सब ठीक है कह कर उन्हें भी मना लेती हूँ… सपने ऊंचाई के और […]

Read More
Back To Top