मुलाकात


मिला आज उससे मैं कई सालों बाद,
वही मासूमियत और उसकी वो बालो की खुशबु के साथ,

आई थी वो उसकी मुस्कान में कुछ दर्द और बातें छिपा कर,
कहने आई ऐसी बातें जो बयां न कर पायी दूर रह कर,

दर्द देने के लिए नहीं पर इस बार दर्द बांटने आई थी,
कहने आई थी कि कैसे प्यार में चोट उसने भी खायी थी,

एक पल ऐसा भी था दोनों कहना चाहते थे अपने दिल की बात भी,
पर डर इस बात का कि ज़िन्दगी फिर कोई खेल न खेल जाये इस बार भी,

जैसे जैसे समय भी बीत रहा था
और हम दोनों का दिल भी कही न कही रो रहा था,

कहना कुछ और चाह रहे थे
पर बोल कुछ और रहे थे,

एक दूसरे से प्यार की बात करना चाहते थे
पर बस, बैठे इधर उधर की बातें कर रहे थे,

मिलना था उससे अपनी दोनों बाहों में भर कर,
पर क्या करते हम अब हम साथ नहीं थे साथ हो कर,

एक पल ऐसा भी आया कि कह दू लौट आ फिर से,
हिम्मत न हुई ये सोच के कही ये पल ना खो दूँ फिर से,

आखिर अलविदा कहने का समय भी आगया
उससे फिर से दूर जाने का वक़्त भी आगया,

अब सिर्फ ये पल ही है जिसमे ये मेरे साथ होगी
अब ये खुदा जाने के फिर अब मुलाकात कब होगी…

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