कुछ साथी सफर में छूट गए…

“ज़िन्दगी के दौड़ में कुछ यू दौडे हम सब
कोई आगे तो कोई पीछे यू बिछड़ गए हम सब,

दोस्ती की कसमें जो कभी खाए करते थे,
जो मिलने के वादे भी किया करते थे,

कुछ दूर क्या हुवे हम घर की जलतोजहत में,
सब बदल गए थोड़े मसरूफ क्या हुवे हम सब,

पैसे कमाने की होड़ में सब चल पड़े है,
न जाने कितने तो विदेश चले गए है,

घर और काम की ज़िम्मेदारी भी बढ़ गयी है,
अब बस हम इन्ही में हम सिमट के रह गए है,

इस सफर में नए दोस्त तो कई बनाये है,
पर कुछ हमसे तो हम उनसे रूठ गए है,

याद आती है वो शैतानिया हम जो किया करते थे,
कैसे बिना सोचे अपनी हर बात बता दिया करते थे,

तस्वीरें कई है जो यादें दिला जाती है,
उनमें कई कहानियां है जो आंखे नम कर जाती है,

कई दोस्त है जो हमे भूल गए,
सच तो ये है के कई साथी सफर में छूट गए…

4 thoughts on “कुछ साथी सफर में छूट गए…”

  1. Nice!!.. everyone face’s this phase in life. keep writing n sharing such good thoughts with all of us. 👍

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